जब पूरा देश पार्टी मनाता है तो देश के जवान और भी ज्यादा अलर्ट होकर ड्यूटी करते है
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आज के दिन ज्यादातर लोग इकठा होकर पार्टी धुम्म धड़का करते है ज्यादा से ज्यादा लोग एकत्र होकर 31 दिसंबर की बिदाई और रात 12 बजे के बाद नई ईयर स्वागत करते है जिसमे फॅमिली और फॅमिली के सभी लोग मिलकरर म्यूजिक बजाते है और डांस करते है पूरा एरिया खुशनुमा रहता है , सभी के दिल में एक नयी उमंग होता है , और सबके मन में यही भगवन से प्राथना होता है की भगवन ये पूरा साल हमारा अच्छे से बीतने चाहिए
जब पूरा देश पार्टी मना रहा होता है लोग उस टाइम ये भूल जाते है की जहा पूरा देश आज एन्जॉय कर रहा है वही पे हमारे देश के जवान बॉर्डर पे हमारे ही सुरक्षा केलिए पहले से और ज्यादा अलर्ट होकर ड्यूटी करते है , जहा पूरा देश पार्टी मना रही होती है जहा सब लोग मिलकर म्यूजिक और डांसिंग कर रहे होते है वही देश के जवान अपनी जान हथेली पे रखकर आतंकी एरिया में गश्त कर रहे होते है , देश के जवान भी इंसान ही होते है उनके मन में भी घर जाकर अपने घर में अपने परिवार के साथ सम्मय बिताने औरनई साल मानाने का इक्छा होता है , लेकिन उनके लिए सबसे जरुरी होता है देश और देशवासी
जवानो का दुःख
जब भी 31 दिसंबर आने वाला होता है तब्ब देश के जवान भी चाहते है की वो अपने घर पे परिवार के साथ एन्जॉय करते , दोस्तों के साथ कही बाहर जाकर दिन को खाश बनाते लेकिन उनकी सबसे मज़बूरी होती है की जिस दिन कोई खाश दिन होती है उस दिन सिक्योरिटी भी बाकि दिन की अपेक्षा खाश ही होती है इसीलिए 31 दिसंबर हो होली हो दिवाली हो दुर्गापूजा हो ईद हो जैसे खाश दिन पे बहुत ही मुश्किल से उस दिन जवानो को छूती मिलती है क्युकी ऐसे खाश दिन में ज्याददातार लोग यही चाहते है की हो इस खाश दिन को अपने घर वालो के साथ मनाया जाये , लेकिन ऐसे खाश दिनों में देश के दुसमन भी घात लगाकर बैठे होते है की कैसे देश में किसी खाश खुसी वाले दिन को मातम में बदल दिया जाये ,यही सब देखते हुए देश के जवानो को दुखी होकर ज्यादातर खाश दिनों पे घर से बहार ही बिताना पड़ता है लेकिन जवान तब भी भले ही दुखी होकर करे लेकिन ड्यूटी में कोई भी कमी नहीं होने देते है जवानो की दुःख इतना से ही ख़तम नहीं होता है जब्ब लोग पार्टी करके नींद से सो जाते है तो जवान बेचारे नींद आने के बाद भी सोते नहीं है वो वही अपनी आँखों में नींद लेकर भी जगे रहते है और अगर बाद में सोते भी है तो पूरी नींद किये बिना ही अगली दिन फिर से पूरी तरह सुबह होने के पहले ही ड्यूटी केलिए चले जाते है , ऐसे समय में तो उन्हें ठीक से खाना भी खाने को नहीं मिलता है ,
जवान अक्सर बोलते है कोई बात नहीं ड्यूटी है बाद में आराम कर लूंगा
जहा लोगो की सिर्फ 8 घंटे की ड्यूटी होती है वही हमारे देश के जवान लगातार 12 से 15 घंटा या कभी कभी तो इससे भी ज्यादा ड्यूटी करनी पड़ती है , ऐसे में जवान न तो ठीक से आराम कर पाते है और नहीं ठीक से खाना खा पाते है , जवान नींद में होते हुए भी अपने देश के फर्ज के प्रति ईमानदारी से अपनी भूमिका निभाने में थोड़ी भी संकोच नहीं करते है , वो चाहे आराम न कर्रे , या ठीक से भर पेट खाना भी नहीं खाये हो लेकिन उनका सिर्फ एक ही मकसद होता है की उनका देश और देशवासी सेफ रहे , जब जवान ड्यूटी पे होते है जब उन्हे कोई बोलता है आराम कर लीजिये तो चाहे जितनी भी थके क्यों न हो वो सिर्फ इतना ही बोलते है की बाद में आराम कर लेंगे
जवानो की फिर भी कोई शिकायत नहीं होती है
जब जवान लगातार ड्यूटी करने के बाद अपने कैंप पे पहुंचते है तो आराम करने से पहले ये मैसेज मिल जाता है की आपको एक मिशन पे जाना है , तो ऐसे में जवानो के दिल में दर्द बहुत होता है लेकिन देश के फर्ज के आगे हमेसा झुकना पडत्ता है और बिना किसी संकोच के जवान खुसी का एहसास दिलाते हुए चले जाते है , वो ऐसे समय को भी बहुत ही आसानी से झेल जाते है वो अक्सर यही बोलते है कोई बात नहीं सर बाद में आरम्म कर लेंगे , जवानो को कितना भी ड्यूटी करना पड़े वो खुसी खुसी ड्यूटी करते है उनकी कभी शिकायत नाही होती है
जवानो के परिवार भी बहुत जवानो जैसा ही बहुत ज्यादा दर्द झेलते है
जब महीनो तक जवान घर से बहार रहते है तो ऐसे में उनके घर वाले भी बहुत ही ज्यादा दर्द झेलते है , जब किसी खुसी का माहौल होता है उस टाइम घर वालो की भी इच्छा होती है की वो भी अपने भाई बचा या पति के संग रहते तो खुसी ज्यादा होती , जब्ब जवान के घर पे उनकी पत्नी दुसरो को सजते सवारते देखते है तो इनके मन में भी यही ख्याल आता है की काश उनके पति घर पे होते तो खुसी का माहौल ज्यादा होता , ऐसे में उनके घर वालो की दुःख का एहसास किसी जवान की पत्नी को ही हो सकता है , कभी कभी तो ऐसे टाइम में पत्नियों का जवान लोग ड्यूटी पे होने की वजह से फ़ोन भी उठा नही पते है क्युकी जवानो को ड्यूटी में फ़ोन रखना माना है
इन दुखो को झेलने के बाद भी जवान हर हाल में देश की सुरक्षा करते है उनकी केलिए देश और देशवासी से बड़ा कोई नहीं होता है , उनके लिए परिवार से पहले देश आता है
घर में जश्न की रौशनी थी ,
और सरहद पे रत अँधेरी थी
हम हस्ते रहे अपनों के संग ,
वहाँ जवान की आँख नाम थी ।