
देश के जवान की ड्यूटी सिर्फ एक जॉब नहीं है बल्कि जवान की ड्यूटी हमेसा जान की खतरों से झुझता रहता है , पैरामिलिट्री जवान हमेसा आतंकरोधी ऑपरेशन या नक्सल विरोधी अभियान करते रहते है , हर समय पैरामिलिट्री जवान अपने और अपने घर वालो से आगे देश की सुरक्षा को रखते है ,
लेकिन एक सवाल है जो मेरे मन में बार बार आता है क्या जितना ईमानदारी से पैरामिलिट्री जवान अपने देश और देशवासियो के सेवा के प्रति हर समय जागरूक है , उतना ही जागरूक देश के सरकार हम जवानो के प्रति है ?
जो जवान देश केलिए अपना सबकुछ निछावर कर देते है उन्ही जवानो के प्रति हमारे देश के मुखिया उनके सेफ्टी को शेयर मार्किट के भरोसे छोर देते है , यानि की देश की जवानो और उनके परिवार का फ्यूचर NPS और UPS के तहत जबरदस्ती थोपा जा रहा है , जिसे हम सारे जवान अपने फ्यूचर को जोखिम में देखकर अत्यधिक परेशान और चिंतित है ,
जिन हाथो ने देश की सीमाएं को मजबूत किया हो , मासूमो को मिलिटेंट से बचाये हो , आज वही हाथ अपनी पेंशन केलिए अदालतों के चक्र्र काटने को मजबूर है ,
दिल्ली हाईकोर्ट ने जब न्याय दिया , तो हम सारे जवानो में खुसी की लहर दौड़ गयी थी हर जवानो को अपने और अपने परिवार का फ्यूचर सेफ देखकर सभी खुशनुमा हो गए ,
लेकिन तभी सारे जवानो की खुसी मातम में तब बदल गया जब सभी को पता चला की सरकार ने दिल्ली हाइकोर्ट के पेंशन के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चले गए , हमारी खुसी की तारीख थी 11 january 2023 , जिसमे हाइकोर्ट का ये फैसला था की केंद्रीय अर्धसैनिक जवानो को पुराणी पेंशन का लाभ मिलना चाहिए , और जवानो केलिए दर्दनाक पल था 5 जुलाई 2023 जिस दिन हाइकोर्ट के वो पेंशन वाली आदेश पे रोक लगा दिया ,
लेकिन सच ही कहा है किसी ने की बुरे नियत से किया गया काम में कोई न कोई कमी रही जाती है , जिस NPS को हमारी लचर सरकार जबरदस्ती थोपना चाहती है , वो जल्दबाजी में ये भूल गए की जो 22 दिसंबर का नोटिफिकेशन NPS केलिए लाये थे उसमे फर्स्ट पैराग्राफ में ही ये साफ साफ लिखा हुआ है की ये नियम देश के सस्त्र बल पे लागु नहीं होंगे , और भारत के संविधान में भी पेंशन के हक़ के पक्ष में अलग से प्रावधान बनाये हुए है , फिर भी हमारे देश के सरकार कोई न कोई तिगड़म लगाकर जवानो को पेंशन से वंचित रखना चाहता है , जो खुद 1 दिन का भी अगर मंत्री पद पे रहे हो तो पेंशन के हक़दार बन जाते है और जवानो को जो पूरी जिंदगी देश की सेवा में बिता देता है उसे nps और यूपीएस के फायदे समझाने की कोसिस करते है
आज लाखो पैरामिलिट्री जवान ये सवाल कर रहे है की जब सरकार खुद हमें ससस्त्र बल मान रही है , जब गजट नोटिफिकेशन और अदालत का फैसला हमारे पक्ष में है , तो फिर हमें पुराणी पेंशन से वंचित क्यों रखा जा रहा है , ये मामला अब केवल पेंशन का नहीं , बल्कि न्याय , समानता और जवानो से जुड़ा हुआ बन चूका है .
सिमा पर जवान का कोई कोर्ट नहीं होता ,
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वो आदेश मनता है – सवाल नहीं करता है ,
मगर जब जवान इंसाफ मांगता है ,
तो सरकार कहती है चलो सुप्रीम कोर्ट चलते है