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soldier trening life problem in hindi

जब भी कोई स्टूडेंट  काफी  मेहनत के बाद जब फौज ज्वाइन होता है , तो उसके मन में कई प्रकार के सवाल घूमता है ,  अपने आप पे कभी गर्व महसूस होता है तो कभी डर महसूस करता है , वो कई प्रकार  के उलझन में रहता है , लगभग सभी को  ऐसा महसूस होता है ,

             और  जो लोग  बाहर से फाॅर्स की लोगो को देखते है उनका मन में यही ख्याल आता  है की यूनिफार्म में सबकुछ चकाचक लग रहा है , लाइफ अछि से काट रहा है सरकारी यूनिफॉर्म , बेल्ट , टोपी , राइफल  बढ़िया बढ़िया गाड़ी में घूमना ये सब देखने में मस्त लगता है  , उन्हें लगता है  की जीवन  की टोटल  तकलीफ  समाप्त हो गया है , लेकिन ऐसा नहीं है फाॅर्स की लाइफ जितना देखने में मस्त लगता है  उतना है नहीं  , जिस  दिन कोई सिविलियन  कोई फाॅर्स ज्वाइन करता है  , उसी  दिन से उसकी खुद की आजादी लगभग समाप्त हो जाता है , उसका खुद का सारा आदत चेंज करना पड़ता है , कोई भी फौजी अपनी मस्ती से देर सुबह तक  नहीं सो सकता , कोई भी जवान जैसे घर में लेट नहाना खाना और घूमना फिरना कुछ भी नहीं  कर सकता मेरा 11 साल का करियर में अबतक ऐसा नहीं हुआ की हम कैंप में  हो और अपनी मर्जी से लेट तक  सोकर उठे हो , या कही भी अपने मन से घूमने फिरने नहीं  जा सकते है , फाॅर्स की जॉब सभी लोग नहीं कर सकते है , जब कोई सिविलियन फौज की ड्यूटी ज्वाइन करता है तो जैसे ही ट्रेनिंग सुरु होता है वैसे ही ढेर सरे परेशानिया एक सात सुरु हो जाता है जैसी  की  सुबह जल्दी उठना  , उठकर जल्दी सी ब्रश करना ढाढी बनाना नहाना  और ये सब करवाई सुबह 5 बजे के पहले ही कम्पलीट करना होता है  , क्युकी फाॅर्स में सभी  लोगो को कोई निर्धारित जगह पे एकत्रित होकर मार्का लगाया जजता है  , उससे  पहले जितने भी ट्रेनीज होते है उनका काम होता है ट्रेनिंग एरिया की साफ सफाई और सभी का पर्सनल हथियार और जितने भी ट्रेनिंग की जरुरत वाली चीजे होती है वो सब  मार्का से पहले ट्रेनिंग वाले जगह पे निकला  हुआ होना चाहिए , जो  की कोई  भी सिविलियन केलिए पहले ही दिन से  ये सारा काम आसान   नहीं होता है ।   और ऐसा कोई ऑप्शन नन्ही होता है की आप ये सब  काम को न करे , आपको चाहेजितना  भी तकलीफ हो आपको ये सरे काम करने ही होंगे ,अगर  आप एक भी दिन गलती से सुबह लेट तक सोते रह गए और सुबह का मार्का में नहीं पहुंचे तो आपको भरी पनिशमेंट मिलेगा जिसके वजह से कोई भी जवान अपनी  टोटल काम समय पे कर लेते है  , फौज  की परेशानी केवल ट्रेनिंग  नहीं होती है ट्रेनिंग के सिवाय भी ऐसे कई परेशानी है जो ट्रेनिंग से ज्यादा तकलीफ देह होते है , जैसे कही भी ट्रेनिंग आप करोगे तो वह कमसे कम  300 बन्दे होते  है जिनका एक साथ ट्रेनिंग होता है , ऐसे  में  जब  90 मिनट ट्रेनिंगग के बाद सबको एक साथ छोरा जाता है , जिसमे सरेलोग एकसाथ नास्ता केलिए भागते हुए जायेंगे जिसमे 90 मिनट की ट्रेनिंग के बाद ड्रेस पूरी तरह से धूल मिटी से भर जाता है , लेकिन ट्रेनीज को 45 मिनट के बाद उन्हें ट्रेनिंग की अगली क्लास केलिए मिलना होता है , और अगर आप अगली क्लास केलिए मिलने में लेट हुए तो भी सभी के सामने आपको दण्डित किया जायेगा , तो फाॅर्स के कुछ ऐसे नियम है जिसे पूरा करना बहुत कठिन होता है , और ये सारा परेशानिया सिर्फ 1 या 2 दिन की नहीं की होती है , बल्कि पुरे ट्रेनिंग में यही नियम चलता है जो की 44 वीक का होता है , बस ये मान  लीजिये की तकलीफ ख़तम नहीं होता है , लेकिन इन तकलीफो को झेलने की आदत हो जाता है ।

ट्रेनिंग के टाइम की परेशानिया

1. नया  वातावरण – किसी भी इंसान को अचानक से नयी लोगो के बिच अपने आप को सेट करना पड़ता है , जिन्हे  आप जानते नहीं है   , की  किसका कैसा आदत है उन लोगो को के साथ रहना पड़ता है जहा पे भरी तादाद में भारत के अलग अलग राज्य से लोग आते है , फौज में कुछ अजीब से सिस्टम भी है जो आप आपने हिसाब से देखिये सही है या गलत फौज में कोई एक भी गलती करता है तो सजा सब को मिलता है , और ये नियम अंग्रेजो के टाइम से चलता आ रहा है ,

2 – कड़क डिसिप्लिन – फौज  की लाइन में  एक कहावत है की ड्यूटी तो होता रहेगा पहले तुम्हारा डिसिप्लिन ठीक करना है , और जब ये डायलाग किसी को बोला जात्ता है तो सब समझ जाते है अब उसके साथ क्या होनेवाला है , फौज में सबसे ज्यादा अगर कुछ फॉलो होता है तो वो है डिसिप्लिन जिसे सुनने में तो कुछ खाश नहीं लेकिन फॉलो करने में पसीने निकल जाते है , इतना बड़ा फौज को सुचारु रूप से हैंडल करने में डिसिप्लिन का अहम् रोल होता है , फौज में कोई भी काम करना होता है तो ये जरुरी होता है की काम को डिसिप्लिन के दायरे में ही पूरा किया जाए    

3 – कमांड और पनिशमेंट का डर – जब भी कोई ट्रेनीज किसी भी प्रकार का काम करता  है जो सीनियर के कमांड के खिलाफ   है , तो  उसे पनिशमेंट दिया जाता है , ट्रेनिंग  में बहुत से ऐसे आदेश मिलते है जो मन में डर पैदा करता है की हम  इसे कर पाउँगा की नहीं

4 – फिजिकल कठिन वर्क – ट्रेनिंग में कई बार ऐसा होता है की पूरी दिन की ट्रेनिंग के बाद रत में भी देर रात तक बैठा कर क्लास लिया जाता है , जिससे जवानो को बहुत ज्यादा दिकत का सामना करना पड़ता है , ट्रेनिंग में हर हफ्ता को फिजिकल टेस्ट होते रहते है जैसे लॉन्ग रनिंग , लॉन्ग जम्प , हाई जम्प , मंकी  रोप , सिटप , पुश उप  

5 – ड्रिल की लम्बी क्लास – सुबह के एक्सरसाइज के बाद नास्ते कएने के तुरंत बाद से ही ड्रिल की क्लास सुरु हो जाती है , जिसमे जवानो को एक साथ चलना फुर्ती से एक साथ कदम आगे निकलना सलूट मारना ये सब सिखाया जाता है  

6 – घरवालों  की याद – फौज  में सबसे ज्यादा हमको परेशानी लगता है की घर वालो से दूर रहना पड़ता है , सारा दिन का शेडूल ग्राउंड की होती ऐसे में जब जवान थकहारकर आराम करने जाता है तो बिस्तर पे जाते ही जवानो को नींद आने लगता है और वो सो जाते है , जिसके  कारन जवान अपने घर वालो से काफी दिनों तक बात भी नहीं कर पाते है 

to तो दोस्तों अगर आप फौज ज्वाइन करना चाहते है , तो सबकुछ सोच समझकर ही ज्वाइन करे मेरे ऐसे काफी दोस्त है जिन्होंने फौज तो ज्वाइन किया लेकिन कुछ महीनो में ही जॉब छोड़कर घर वापस  आगये है इस प्रकार के मामले यूट्यूब पे अवेलेबल है आप वह जाकर भी समझ सकते है , अभी पिछले साल ही कॉन्स्टले उत्तम कुमार ने हमारे कंपनी से रिजाइन मरकर गया है ।

                                                                                                               दोस्तों  यहाँ तक पढ़ने केलिए दिल से धन्यवाद ।